बृहद-गौतमीय तंत्र

क्रिया काण्ड के बत्तीस अध्यायों में रचित यह ग्रंथ श्री कृष्ण के विभिन्न मंत्रों की चर्चा करते हुए उनके विभिन्न रूपों की चर्चा करता है और विभिन्न फलों के अनुसार श्री कृष्ण के उन स्वरूपों की तांत्रिक पूजा की विस्तृत चर्चा करता है। इस प्रकार श्री कृष्ण का स्मरण इस पुस्तक का केंद्रबिंदु है।

2 लेख उपलब्ध हैं

  1. देवी कृष्णमयी प्रोक्ता राधिका परदेवता - बृहद गौतमीय तंत्र

    श्री राधा, श्री कृष्ण का अभिन्न स्वरूप हैं एवं सब पर शासन करने वाली परदेवता हैं। वे समस्त लक्ष्मियों की आधार रूपा, समस्त सौंदर्य की मूल स्रोत एवं परम सम्मोहिनी (मोहित करने वाली) हैं।

  2. इदं वृन्दावनं रम्यं - बृहद-गौतमीय तंत्र

    श्री कृष्ण कहते हैं कि "यह सुंदर वृंदावन मेरा नित्य निवास धाम है। पशु, पक्षी, वृक्ष, कीट, मनुष्य, और मेरे साथ यहाँ रहने वाले मृग मरीचिका सभी मृत्यु के पश्चात् मेरे नित्य धाम में ही रहेंगे।"