“ नरक स्वर्ग अपवर्ग आदि की, ख़ाक वृथा मत छानिये |
तुम हो नित्य किंकरी जिनकी, तीन स्वरुप पहचानिये || ”
- जगदगुरु श्री कृपालु जी महाराज
हे अज्ञानी प्राणी, तुम बिना किसी उदेश्य के नरक और स्वर्ग आदि में भटकते हो ? तुम श्री राधा के नित्य दास हो। इसे पहचानने की कोशिश करो |
तुम हो नित्य किंकरी जिनकी, तीन स्वरुप पहचानिये || ”
- जगदगुरु श्री कृपालु जी महाराज
हे अज्ञानी प्राणी, तुम बिना किसी उदेश्य के नरक और स्वर्ग आदि में भटकते हो ? तुम श्री राधा के नित्य दास हो। इसे पहचानने की कोशिश करो |

