अति उदार विवि सुंदर - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री हित चौरासी (57)

अति उदार विवि सुंदर - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री हित चौरासी (57)

अति उदार विवि सुंदर, सुरत सूर सुकुमार।
(जे श्री) हित हरिवंश करो दिन, दोऊ अचल विहार॥
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री हित चौरासी (57)

श्री हित हरिवंश चन्द्र महाप्रभु कहते हैं कि हे अति उदार और परम सुन्दर युगल किशोर, हे सुरत क्रीड़ा के शूरवीर सुकुमार युगल वर! आप दोनों दिन-रात (नित्य निरन्तर) इसी प्रकार अविचल विहार ही करते रहें। (यही हमारा परम सुख है।)